Monday, November 24, 2008

याद बड़ी आ रही किउन तेरी!

सायद बरसों बीत गए हो किसकी इंतजार में,
वो मासूम सी चेहेरेपे इक प्यारी सी मुस्कान ने,
अपनी उन्ग्लिओं से लटों को सुलझाती हुई बोली,
कास वो केहती "में हूँ तुझे ढेर सारा प्यार देने!"

अब भी याद हे हर वो पल जो तुम्हारे साथ बिताये,
मिलके सजायेथे दोनों इक साथ कभी हजार सपने,
ये ऑंखें तो कई साल पहले सुख छुकी थी,
नमी चली आई कब मेरे अन्खोमे बिन पूछे नजाने|

अपनी जिनगगी में जेसे कोई इक सन्नाटा छा गई थी,
अब ही जान डाली हो जेसे तेरे पायल की झंकार ने,
होंठ तो खिल उठी हे फिर इक बार बरसों के बाद,
बस इंतजार हे थिरकने की वो बोल फिर गुनगुनाने|

जाडें की मौसम में चादर ओढे सो गई थी जेसे यादें मेरी,
अभी तो नींद से जागा हूँ फिर याद बड़ी रही किउन तेरी!

ये छोटी सी दिल की आवाज हे, ये में मेरा सबसे अच्छी दोस्त रूबी को डेडीकेट कर रहा हूँ!

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1 Comments:

Blogger nirmal said...

ତମେ ଏମିତି ଭଲ ଲେଖୁଥାଅ |

November 28, 2008 at 8:26 AM  

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