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तेरी इश्क की असर हे!

हर वो एहसास को अल्फाज देना क्या जरुरी हे,
इस्क में हर पल उनकी याद आना क्या जरुरी हे,
अरे इक अर्सों से हम ये पूछते रहे हें,
क्या सबको जिंदगी में मुहबत करना जरुरी हे?


अरे वो दिन था सुहाना जब हम अपने थे,
अब केसी अजब सी ये मज़बूरी हे,
वो रोये तो हम यहाँ खूब रोते हें,
वो मुस्कुराए तो यहाँ मुस्कुराना भी जरुरी हे|

जालिम ये मुहब्बत किउन दिलको तडपाती हे,
चेन तो गई हे कबकी, अब तो नींद भी जा रही हे,
मून मोद्लूं हर एक से जो तेरी आँखों में आसूं दे,
दिल तो धड़कती हे मगर हर धड़कन पे नाम तो तेरी हे|

खुदा करे में यूँही लिखता रहू कुछ खास तेरी यादों में,
ये कुछ अल्फाज मेरे दिलकी तेरी इश्क की असर हे!